02-Feb-2026
चीन में अभी त्योहारों का समय चल रहा है! पूरा चीन अब पारंपरिक चीनी नववर्ष या वसंतोत्सव का स्वागत करने के लिए उत्सव की लालटेन से सजा हुआ है।
चीन की हवा में अब बसंत महोत्सव (स्प्रिंग फेस्टिवल) की खुशबू बसने लगी है। 17 फरवरी से शुरू होने वाले 'घोड़े के वर्ष' (Year of the Horse) की तैयारियाँ जोरों पर हैं।
अब दुनिया का ध्यान तीन अरब लोगों की माटी अफ्रीकी महाद्वीप की ओर है। अफ्रीकी महाद्वीप के देशों का अपना संघ है, जिसे अफ्रीका संघ के रूप में जाना जाता है।
पेइचिंग: पर्यटकों ने युडू पर्वत में "आइस फ्लोटिंग" का अनुभव लिया
2026 के चीनी चंद्र नव वर्ष (अश्व वर्ष) के आगमन के साथ ही, "घोड़े के तत्वों" से युक्त विभिन्न वस्तुएँ उपभोक्ता बाज़ार में लोकप्रिय हो गई हैं। पारंपरिक शिल्प कौशल और आधुनिक डिज़ाइन के संयोजन से बनी ये वस्तुएँ न केवल शुभ अर्थ रखती हैं, बल्कि व्यावहारिक और सौंदर्यपूर्ण भी हैं।
चीन के जियांगसू प्रांत के नानजिंग शहर में गोल तरबूजों को गुलाब के आकार में तराशा गया है, जिनकी पंखुड़ियाँ एक दूसरे के ऊपर परत दर परत सजी हैं, जो देखने में बिल्कुल सजीव लगती हैं। किसने सोचा होगा कि जिस तरबूज को हम रोज़ खाते हैं, उसे कलाकृति में रूपांतरित किया जा सकता है?
क़लम की ताक़त पर संदेह न करना, क्योंकि हर कहानी की शुरुआत और अंत इसी कलम से होता है
बेहतर के लिए प्रयास करता हूं और लगातार नए विचारों का सृजन करता हूं
बहुत सीमित हूं मैं अपने शब्दों में,लेकिन बहुत विस्तृत हूँ अपने अर्थों में
भारत से विशेष टिप्पणीकारों का स्वतंत्र लेखन
खिलौने... सुनने में यह शब्द बहुत छोटा लगता है लेकिन इनका असर हमारे दिल पर बहुत गहरा होता है। एक छोटा-सा खिलौना हाथ में आते ही बच्चों के चेहरे पर जो स्माइल आती है, वो अनमोल होती है। चाहे वो गुड़िया हो, रिमोट वाली कार हो या कोई प्यारा-सा टेडी बियर, खिलौने हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया जहाँ कोई टेंशन नहीं, कोई शोर-शराबा नहीं, बस मस्ती और सुकून होता है। यहाँ तक कि हम बड़े भी जब बच्चों को खेलते देखते हैं, तो अपनी सारी परेशानियां भूल जाते हैं। तो चलिए, आज की न्यूज़ स्टोरी में आपको एक बहुत ही मजेदार और दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं।
आज की दुनिया एक ऐसे दौर से गुज़र रही है जहाँ हर बड़ी खबर किसी न किसी तरह ग्लोबल पॉलिटिक्स की शतरंज से जुड़ी हुई है। चाहे वह अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ता तनाव हो, रूस को लेकर अमेरिका के नए कानून हों, या भारत और चीन जैसे उभरते देशों की भूमिका हो, हर चीज़ एक बड़ी तस्वीर की ओर इशारा करती है। सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ़ अलग-अलग घटनाएं हैं, या दुनिया एक नए पावर शिफ्ट की ओर बढ़ रही है? इसी संदर्भ में, आज हम दिल्ली यूनिवर्सिटी के देशबंधु कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह से बात करेंगे, जो ग्लोबल पॉलिटिक्स पढ़ाते हैं और इंटरनेशनल मामलों में खास पकड़ रखते हैं, ताकि इन जटिल ग्लोबल डायनामिक्स को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
हाल ही में चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की 12वीं जन प्रतिनिधि सभा का चौथा पूर्णाधिवेशन और 12वीं जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन का चौथा पूर्णाधिवेशन आयोजित हुआ।
हाल ही में ल्हासा सीमा शुल्क कार्य सम्मेलन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विदेशी व्यापार को प्रोत्साहित करने वाले नीतिगत उपायों के निरंतर प्रभाव के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के कुल आयात-निर्यात का मूल्य 8 अरब 47 करोड़ 90 लाख युआन तक पहुँच गया।
वर्ष 2025 में शीत्सांग का सांस्कृतिक और पर्यटन बाजार तेजी से बढ़ता रहा और इसने देश-विदेश से आए 7 करोड़ 7 लाख 33 हज़ार 700 पर्यटकों को आकर्षित किया, जो वर्ष 2024 की तुलना में 10.71% अधिक था।
लिज़ी बंदरगाह शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के शिगाज़े शहर के चोंगपा काउंटी में स्थित है और दक्षिण में नेपाल के मुस्तांग काउंटी से सटा हुआ है।