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नये तिब्बत में विकास होने का ऐतिहासिक रुझान नहीं बदलेगा

2020-03-28 17:50:51
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चीनी तिब्बत अनुसंधान केंद्र के इतिहास अनुसंधान संस्थान के प्रधान चांग युन्न ने 28 मार्च को यानी तिब्बत के दस लाख भू-दासों के 61वें मुक्ति दिवस के मौके पर एक लेख लिखकर तिब्बत में आर्थिक और सामाजिक विकास का परिचय दिया। उनका लेख यह कहता है:


तिब्बत चीन का तिब्बत है और वह तमाम चीनी जनता का तिब्बत है। तिब्बत के विकास के चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान के महान लक्ष्य से घनिष्ठ संबंध है। यह अखंडनीय है कि प्राचीन काल से ही तिब्बत चीन का एक भाग बना रहा था और नये चीन की स्थापना के बाद तिब्बत में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में स्थापित क्षेत्रीय स्वायत्त शासन नीतियों की उल्लेखनीय उपलब्धियां भी प्राप्त हुई हैं।

चीन विश्व में एक मात्र ऐसा देश है जिसकी ऐतिहासिक सभ्यता पांच हजार वर्षों तक नहीं टूटी। चीन की केंद्रीय सत्ता ने सन 1247 से ही तिब्बत का शासन करना शुरू किया था। 19वीं शताब्दी में चीन के छींग राजवंश के तिब्बत स्थित मंत्री तिब्बत में चतुर्मुखी शासन किया करते थे। तिब्बत के दलाई लामा और पंचन लामा आदि जीवित बौद्धों को केंद्र शासन द्वारा दिये स्वर्णिम बोतल से लॉटरी निकालने की प्रणाली से तय किया जाता था। आज तिब्बत में क्षेत्रीय स्वायत्त प्रदेश की व्यवस्था के कार्यांवयन से तिब्बती जनता के अधिकारों की अभूतपूर्व गारंटी भी की गयी है। उधर पश्चिमी देशों में कुछ व्यक्तियों के घमंड और पूर्वाग्रह से तथ्यों का उल्लंघन किया गया है। हमारा मानना है कि केवल तथ्यों का समादर करने के आधार पर अतीत और आज को स्पष्ट रूप से देख सकेंगे। इतिहास एक आईने की तरह होता है, जो तिब्बत के रोड और व्यवस्था का आत्मविश्वास दर्शाता है। सन 1840 के अफ़ीम युद्ध से साम्राज्यवादी ने चीन के सीमांत क्षेत्रों में अनेक संकट जन्म दी थी। ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने सन 1888 और सन 1903-1904 में दो बार तिब्बत का अतिक्रमण किया था और वहां लोगों की हत्या करने, संपत्ति और सांस्कृतिक अवशेषों को लूटने का अपराध किया था। उन्हों ने तिब्बत में पृथकवादी बल खड़ा किया था। जो आज भी तिब्बत को तकलीफ दिला रहा है। लेकिन चीन की तत्कालीन कमजोर सरकार तिब्बत में से विदेशी बलों को खदेड़ करने में असमर्थ रही थीं। पश्चिमी बलों से डरने की वजह से तत्कालीन चीनी सरकार तिब्बत में अपने शासन को बनाये रखने के कदम उठाने के लिए अक्षम रही थी। सन 1942 में अंग्रेज़ों के समर्थन से तिब्बती स्थानीय सत्ता ने पृथकवादी कार्यावाही की थी। लेकिन तत्कालीन चीनी सरकार विदेशी हस्तक्षेप से डरने के कारण कदम नहीं उठा सकी। सन 1949 के जुलाई में तिब्बती पृथकवादियों ने एक बार फिर हान जातियों को खदेड़ने की कार्यवाही की थी। तब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली सिन्ह्वा समाचार एजेंसी ने अपने संपादीय में दृढ़ता से कहा कि तिब्बत चीन की प्रादेशिक भूमि ही है, इसे किसी भी विदेशी आक्रमण की इजाजत नहीं की जाएगी। तिब्बती जनता चीनी जनता का अखंडनीय भाग है, इसे विभाजित करने की इजाजत हरगिज नहीं की जाएगी। सन 1951 की 23 मई में नये चीन की केंद्र���य सरकार ने तिब्बत की स्थानीय सत्ता के साथ मशहूर दस्तावेज धारा सत्रह पर हस्ताक्षर किये जिस के मुताबिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने तिब्बती जनता का नेतृत्व लेकर साम्राज्यवादी शक्तियों को तिब्बत से खदेड़ दिया। इससे देश की एकता और चीनी राष्ट्र की सम्मानता की रक्षा की गयी। सन 1959 में तिब्बत के प्रतिक्रियावादी उच्च वर्ग ने सशस्त्र विद्रोह किया। केंद्र सरकार को विवश होकर तिब्बत में समय से पूर्व में लोकतांत्रिक सुधार शुरू करना पड़ा। जिससे तिब्बत में सैकड़ों सालों के लिये चल रही भू-दास व्यवस्था को खत्म किया गया। दस लाख भू-दास अपनी भूमि का स्वामी बन गये। तिब्बती इतिहास का नया अध्याय जोड़ा गया। यह कहा जा सकता है कि तिब्बत का मूल परिवर्तन शांतिपूर्ण मुक्ति से शुरू हुआ था और तिब्बत का भारी विकास लोकतांत्रिक सुधार से ही शुरू हुआ था।

लोकतांत्रिक सुधार होने के इधर के 61 सालों में तिब्बत में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। तिब्बत में आधुनिक औद्योगिक व्यवस्था कायम की गयी है और आर्थिक व सामाजिक संदर्भ में उल्लेखनीय प्रगतियां भी हासिल की गयी हैं। सन 1959 में तिब्बत की जनसंख्या 12.28 लाख रही थी जबकि सन 2018 में तिब्बती जनसंक्या 34.38 लाख तक जा पहुंची है जिनमें 90 प्रतिशत भाग तिब्बती जातीय है। वर्ष 2019 में तिब्बती लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा 70.6 वर्ष तक जा पहुंची है जबकि शांतिपूर्ण मुक्ति के समय यह मात्रा केवल 35.5 रहती थी। वर्ष 2019 में तिब्बत के शहरों में नागरिकों की औसत आय 37410 युआन तक रही और ग्रामीण क्षेत्रों में यह मात्रा 12951 युआन रही। उसी साल के अंत तक तिब्बत में राजमार्गों की लम्बाई एक लाख तीन हजार और 579 किलोमीटर तक पहुंची है। छींगहाई-तिब्बत रेल मार्ग, ल्हासा-शिगात्से रेल मार्ग और ल्हासा-निन्गंची रेल मार्ग का निर्माण किया गया है। तिब्बत में बिजनेस चलाने वाली ग्यारह एयरलाइंस कंपनियों ने कुल 101 उड़ान मार्ग स्थापित किये हैं जो पचपन शहरों से जुड़े हैं। इन के अलावा तिब्बत में विज्ञान व तकनीक, शिक्षा, तिब्बती भाषा की शिक्षा, चिकित्सा और समाज गारंटी आदि में भी उल्लेखनीय विकास किया गया है। तिब्बती पठार पर पारिस्थितिकी का प्रभावित तौर पर संरक्षण किया गया है। तिब्बती पठार पर जल, जलवायु, मिट्टी और विकिरण समेत पारिस्थितिक प्रणाली का अच्छी तरह संरक्षण किया गया है। जिससे विश्व के जलवायु सुधार और वातावरण संरक्षण के लिये भी योगदान किया गया है।

इस साल चीन में खुशहाल समाज का निर्माण करने वाले अभियान का अंतिम साल है। महासचिव शी चिनफिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने तिब्बत के विकास को अत्यंत महत्व दिया है और तिब्बत में गरीबी उन्मूलन के लिए सटीक तौर पर कदम उठाये। पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश ने उद्योग, ई-कॉमर्स और पर्यटन का विकास करने, स्थानांतरण करवाने, पारिस्थितिकी संरक्षण करने और भीतरी इलाकों के सीधी सहायता देने आदि के माध्यम से गरीबी उन्मूलन में भारी शक्ति डाली। यह पक्का विश्वास है कि पार्टी और देश के दूसरे क्षेत्रों के समर्थन से वर्ष 2020 के अंत तक तिब्बत में भी देश के दूसरे क्षेत्रों के साथ साथ खुशहाल समाज का निर्माण संपन्न किया जाएगा। और आर्थिक समृद्ध, समाज प्रगतिशाली, पारिस्थितिक संरक्षण प्राप्त और जनता को खुशहाल होने का समाजवादी नया तिब्बत नजर में आ जाएगा।

( हूमिन )

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