बोधगया : चीन लोक गणराज्य की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ मनाने के लिए प्रार्थना सभा आयोजित

2019-09-16 15:34:03
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15 सितंबर को पूर्वी भारत के बिहार की राजधानी पटना के दक्षिण पूर्व में लगभग 100 किमी दूर स्थित बोधगया में चीन लोक गणराज्य की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ और भारत गणराज्य का 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए प्रार्थना सभा आयोजित हुई। कोलकाता स्थित चीनी कौंसल जनरल छा लीयोउ ने इसमें भाग लिया।

विश्वभारती विश्वविद्यालय के उप कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती, महाबोधि मंदिर की महा पगोडा समिति के महासचिव एनएस डोर्जी, भारत में चीनी बौद्ध संघ के अध्यक्ष छन छीवेइ, महाबोधि मंदिर के मठाधीश चलिंडा, चीनी ताच्वे मंदिर के मठाधीश ह्वेरोंग और बोधगया में 68 मंदिरों के मठाधीश और भिक्षु, कोलकाता में चीनी मूल वासियों के प्रतिनिधियों, स्थानीय पत्रकारों और श्रद्धालुओं समेत एक हज़ार से अधिक लोगों ने प्रार्थना सभा में भाग लिया।

उसी दिन सुबह कोलकाता चीनी मूल वासियों से गठित ड्रैगन नृत्य दल के प्रदर्शन पर प्रार्थना सभा में भाग लेने वाले लोग चीनी ताच्वे मंदिर में इकट्ठा होकर पैदल से महाबोधि मंदिर में बौधि वृक्ष के नीचे आए। भिक्षुओं, भिक्षुणियों और श्रद्धालुओं ने सानपाओ गुणगान गीत गाते हुए चीन लोक गणराज्य की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ, भारत गणराज्य का 72वां स्वतंत्रता दिवस और चीन-भारत संबंध के स्वस्थ विकास के लिए प्रार्थना की।

कोलकाता स्थित चीनी कौंसल जनरल छा लीयोउ ने भाषण देते हुए कहा कि उन्हें सभी लोगों के साथ मिलकर बौद्ध धर्म के तीर्थ स्थल पर चीन और भारत के राष्ट्रीय दिवस और मित्रवत संबंध के लिए प्रार्थना करने में बहुत खुशी हो रही है। बौद्ध धर्म भारत से चीन में प्रसार हुआ। आज चीन विश्व में बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा देश बन चुका है। एशिया में दो बड़े प्राचीन सभ्यता वाले देशों के रूप में चीन और भारत ने विश्व ध्यानाकर्षक विकसित उपलब्धियां प्राप्त कीं, जिससे न केवल दोनों देशों की जनता को लाभ मिलता है, बल्कि एशिया और विश्व की समृद्धि और विकास, मानव जाति के समान भाग्य वाले समुदाय की स्थापना के लिए भी बड़ा योगदान है। उन्हें आशा है कि मौजूदा प्रार्थना गतिविधि से नए युग में चीन-भारत संबंध के विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार हो सकेगा। भारत में बौद्ध धार्मिक जगत समेत विभिन्न जगत के लोग चीन-भारत संबंध के विकास का ख्याल रखते हुए लगातार समर्थन करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच मानविकी आदान-प्रदान के लिए योगदान दे सकें।

(श्याओ थांग)

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