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2019-10-14 11:20:40
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भारत और चीन के संबंधों में और गहराई लाने के लिये और इसे अधिक परिपक्व बनाने के लिये पिछले दिनों चीनी राष्ट्रपति शी चिनफ़िंग की भारत यात्रा को लेकर भारत के अलग अलग मीडिया ने अपनी सकारात्मक भूमिका निभाई। अलग अलग कोणों से राष्ट्रपति शी की यात्रा को कवर किया गया। हिन्दी के साथ साथ अंग्रेज़ी मीडिया ने भी विस्तार से दो दिवसीय इस अनौपचारिक समिट की चर्चा की। अंग्रेज़ी के कुछ प्रमुख अखबारों में से द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपने मुखपत्र पर इसे छापा साथ ही भारत के विदेश सचिव विजय गोखले के हवाले से लिखा कि दोनों नेताओं की छह घंटों तक चली बातचीत में विश्व स्तर पर बढ़ते आतंकवाद, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रखर होने पर चिंता जताई साथ ही व्यापार वाणिज्य को बढ़ावा देने के मुद्दे पर खुलकर बात हुई। अखबार ने शी चिनफ़िंग के उस बयान को भी प्रमुखता दी है जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों देशों ओर यहां की जनता के पक्ष में ये बात है कि हाथी और ड्रैगन हाथ में हाथ डालकर नाचें। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि हमारे बीच मौजूद विरोध सहयोग की राह में आड़े नहीं आने चाहिए। द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा कि दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं।

वहीं एक दूसरे प्रमुख अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने राष्ट्रपति शी की यात्रा को महत्व देते हुए अपने मुखपत्र पर लिखा है कि साथ साथ आगे बढ़ना चीन और भारत की जनता के लिये भी बेहतर है। साथ ही अखबार ने राष्ट्रपति शी के हवाले से ये भी लिखा है हमें एक दूसरे की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए। इस मौके पर दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश को लेकर नए रास्तों की खोज भी करना चाहिए, साथ ही देश की सीमा को लेकर जो समस्याएं हैं उसका समुचित निपटारा किया जाना चाहिए। साथ ही अखबार ने राष्ट्रपति शी के हवाले से संयुक्त सैन्याभ्यास की बात पर भी बल दिया जिससे क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को बल मिले और दोनों देशों में संबंध अधिक बेहतरी की राह पर चलें। अखबार ने आगे लिखा है कि इस समिट के दौरान व्यापार वाणिज्य पर चर्चा के साथ भारत का व्यापार घाटा भी छाया रहा जो 57 अरब डॉलर का है, जबकि चीन भारत व्यापार इस समय 95.5 अरब अमेरिकी डॉलर का है, इस पर राष्ट्रपति शी ने आर्थिक मुद्दों को लेकर नए रास्ते ढूंढने की बात के साथ मैन्यूफैक्चरिंग में आपसी सहयोग और पार्टनरशिप पर बल दिया जिससे दोनों देशों में व्यापारिक संतुलन बने।

इंडियन एक्सप्रेस ने ये भी लिखा कि अपनी भारत यात्रा के समापन के दौरान राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी को तीसरी अनौपचारिक बैठक के लिये चीन आने का न्योता दिया जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया, अखबार आगे लिखता है कि हालांकि अभी तीसरी अनौपचारिक बैठक की जगह और समय अभी तय करना बाकी है।

अंग्रेज़ी अखबार द पायोनियर ने भी बाकी अखबारों की तरह महाबलिपुरम् अनौपचारिक समिट को अपने मुखपत्र पर जगह दी है, अखबार ने चेन्नई कड़ी के साथ चीन-भारत सहयोग का नया युग शुरु , हेडलाइन के साथ खबर को छापा है। पायोनियर ने भी बढ़ते आतंकवाद और कट्टरपन के मुद्दे के साथ साथ व्यापार असंतुलन को प्रमुखता दी है। अखबार ने आगे लिखा है कि राष्ट्रति शी की वर्तमान यात्रा के दौरान ही भारत ने चीनी यात्रियों और पर्यटकों को पांच वर्ष का मल्टी एंट्री वीज़ा दिया है जो कि लोगों में आपसी मेलजोल को बढ़ाएगा और दोनों देश के लोग एक दूसरे को बेहतर तरीके से जान पाएंगे, भारत के इस कदम की अखबार ने सराहना की है। अखबार आगे प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से लिखता है कि दोनों देशों के बीच सहयोग और आपसी आदान-प्रदान वैश्विक स्तर पर तरक्की और उन्नति में कारगर होगा। साथ ही अखबार इस बात की चर्चा भी करता है कि प्रधानमंत्री ने मामल्लापुरम में स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहरों की प्रशंसा करते हुए दोनों देशों के बीच चले महान और प्राचीन ऐतिहासिक संबंधों की चर्चा भी की। इस बातचीत से दोनों ही पक्ष बहुत संतुष्ट और आशांवित नज़र आए।

अंग्रेज़ी दैनिक द स्टेट्समैन ने अपने मुखपृष्ठ पर हेडलाइन के साथ महाबलिपुरम् की अनौपचारिक बैठक को जगह ही है और लिखा है चेन्नई दृष्टि चीन और भारत के बीच एक नई शुरुआत है। साथ ही स्टेट्समैन ने राष्ट्रपति शी के हवाले से लिखा है कि उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोनों देशों के संबंधों पर बातचीत एक दोस्त की तरह हुई, और ये बात बहुत आत्मीय माहौल में हुई। इससे ये सही मायनों में पता चलता है कि दोनों नेताओं के बीच चली ये अनौपचारिक बैठक कितनी सार्थक रही। अखबार ने प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से लिखा है कि चेन्नई दृष्टि ने चीन भारत संबंधों में एक नया अध्याय शुरु किया है। इस गहन बातचीत में ये तय किया गया है कि दोनों देशों के बीच किसी भी विवाद को तूल नहीं दिया जाएगा, और सारे विवादों का हल त्वरित किया जाएगा। अखबार विदेश सचिव विजय गोखले के हवाले से लिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वूहान अनौपचारिक बैठक ने चीन भारत संबंधों को एक नई गति दी वहीं चेन्नई बैठक ने चीन भारत संबंधों में एक नया अध्याय शुरु किया है, साथ ही दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दा, आतंकवाद, कट्टरपंथी विचारधारा, व्यापार और निवेश के बारे में विस्तार से बातें हुईं।

द हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी राष्ट्रपति शी की यात्रा को अपने मुखपृष्ठ पर जगह दी है और कहा कि दोनों नेताओं के बीच चली बैठक सकारात्मक रही और चीन-भारत संबंधों को ये अनौपचारिक बैठक एक नया आयाम देगी।

वहीं हिन्दी अखबारों ने भी महाबलिपुरम् अनौपचारिक बैठक को तरजीह दी, सारे अखबारों ने राष्ट्रपति शी की भारत यात्रा को महत्व देते हुए दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते, निवेश और वैश्विक स्तर पर बढ़ते आतंकवाद को जगह दी, साथ ही इस पूरी यात्रा का सकारात्मक मूल्यांकन किया।

निश्चय ही विश्व के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक मुद्दों पर हुई इस बैठक का भविष्य में बहुत बढ़िया असर होगा, चीनी यात्रियों को मल्टीपल एंट्री वाला ई- वीज़ा भारत में चीनी पर्यटकों, निवेशकों और व्यापारियों की आमद को सुनिश्चित करने में सहायक होगा जिससे दोनों देशों में मानवीय स्तर पर आवाजाही बढ़ेगी, लोग एक दूसरे को लेकर बेहतर समझ बनाएंगे और आर्थिक स्तर पर भी दोनों की जनता को स्पष्ट लाभ मिलने की संभावना और बढ़ी है।

पंकज श्रीवास्तव



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