16 अप्रैल 2020

2020-04-15 21:46:23
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अनिलः पहली जानकारी...

गोवा को कौन नहीं जानता है। पूरी दुनिया में यह अपने खूबसूरत बीचों (समुद्र के किनारों) के लिए जाना जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में देश से लेकर विदेशी सैलानी घूमने के लिए आते हैं। वैसे तो भारत को 1947 में अंग्रेजों से आजादी मिली थी, लेकिन क्या आपको पता है कि उस समय गोवा भारत का हिस्सा नहीं था। गोवा को देश की स्वतंत्रता के 14 साल बाद आजादी मिली थी।

वर्ष 1510 में पहली बार पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किया और उसके बाद लगभग 450 साल तक उन्होंने यहां शासन किया। 19 दिसंबर 1961 को गोवा पुर्तगालियों से आजाद हुआ था, लेकिन वो इसे इतनी आसानी से छोड़ने को तैयार नहीं थे। इसके लिए भारत को सख्त रवैया अपनाना पड़ा था।

भारत ने आजादी के बाद पुर्तगालियों से अनुरोध किया था कि वो गोवा को उसे सौंप दें, लेकिन उन्होंने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। अब गोवा को आजाद कराने के लिए भारत के पास दो ही रास्ते थे, पहला युद्ध के जरिए गोवा पर कब्जा कर लिया जाए या फिर सत्याग्रह से इसकी आजादी की मांग की जाए। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और गांधी जी भी दूसरा वाला विकल्प ही बेहतर समझते थे।

गोवा को आजाद कराने में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया का बहुत बड़ा योगदान था। 1946 में वह गोवा गए थे, जहां उन्होंने देखा कि पुर्तगाली तो अंग्रजों से भी बदतर थे। वो गोवा वासियों पर जुल्म पर जुल्म ढाए जा रहे थे। वहां नागरिकों को सभा संबोधन का भी अधिकार नहीं था। लोहिया से ये सब देखा नहीं गया और उन्होंने तुरंत 200 लोगों की एक सभा बुलाई। यह बात जब पुर्तगालियों को पता चली तो उन्होंने लोहिया को दो साल के लिए कैद कर लिया, लेकिन जनता के भारी आक्रोश के कारण बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। हालांकि पुर्तगालियों ने पांच साल के लिए लोहिया के गोवा आने पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इसके बावजूद भी गोवा की आजादी की लड़ाई लगातार जारी रही।

साल 1961 में भारत सरकार ने तब पुर्तगालियों के चंगुल से गोवा को आजाद कराने की ठानी, जब नवंबर महीने में पुर्तगाली सैनिकों ने गोवा के मछुआरों पर गोलियां चलाई, जिसमें एक मछुआरे की मौत भी हो गई। इसके बाद तो सारा किस्सा ही बदल गया। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने आपातकालीन बैठक की और आखिरकार 17 दिसंबर को यह फैसला लिया गया कि गोवा को आजाद कराने के लिए वहां 30 हजार भारतीय सैनिकों को 'ऑपरेशन विजय' के तहत भेजा जाएगा। इस ऑपरेशन में नौसेना से लेकर वायु सेना तक को भी शामिल किया गया था।


वहीं दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने आज डूडल बनाकर पैकेजिंग, शिपिंग और डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों का धन्यवाद किया है, जो इस मुश्किल समय में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं। कंपनी का कहना है कि समाज के प्रति योगदान देने वाले डॉक्टर्स, मेडिकल कर्मचारी, डिलीवरी बॉयस और हेल्थवर्कर्स के लिए इस डूडल को तैयार किया गया है। आपको बता दें कि कोरोना वायरस के चलते जो लॉकडाउन 14 को खत्म होना था, उसे अब पीएम मोदी ने 3 मई तक बढ़ा दिया है।

गूगल के स्पेशल डूडल को देखें, तो आपको इसमें G लेटर के बाद E लेटर पर एक ट्रक दिखाई देगा, जो दिल फेंकता नजर आ रहा है। जब आप इस डूडल पर क्लिक करेंगे, तो यहां आपको कोरोना वायरस और गूगल डूडल से जुड़ी हर तरह की जानकारी मिलेगी। कंपनी के आधिकारिक पोस्ट के मुताबिक, हमने यह डूडल बनाकर सभी डिलीवरी कर्मचारियों का धन्यवाद किया है, जो इस समय लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं। इससे पहले कंपनी ने डूडल बनाकर डॉक्टर्स और मेडिकल कर्मचारियों का धन्यवाद किया था।

वहीं... खाना खाने के बाद हम माउथ फ्रेशनर के तौर पर मिश्री का सेवन करते हैं। अगर आप अभी तक मिश्री का सेवन सिर्फ माउथ फ्रेशनर के तौर पर करते हैं, तो अब इसे अपनी डाइट में शामिल कर लें, क्योंकि मिश्री सेहत के लिए फायदेमंद होती है।

नियमित तौर पर मिश्री का सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल तो बढ़ता ही है। साथ में रक्त संचार भी सही रहता है। शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने से खून की कमी होती है, बिना कुछ किए थकान महसूस होती है, कमजोरी का एहसास होता है, कई लोगों को चक्कर भी आते हैं। अगर इन सभी समस्याओं से गुजर रहे हैं तो नियमित तौर पर मिश्री का सेवन जरूर करें। मुंह का स्वाद बढ़ाने के अलावा मिश्री के सेवन करने से शरीर को ऊर्जा भी मिलती है। सौंफ के साथ मिश्री का सेवन करने से मूड अच्छा रहता है।

गर्मी के मौसम में कई लोगों को नाक से खून आने की समस्या होती है। मिश्री का सेवन करने से नाक से खून आना तुरंत बंद हो जाता है।

मिश्री का सेवन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। मिश्री में डाइजेस्टिव गुण मौजूद होते हैं, जिससे खाना जल्दी और आसानी से पच जाता है। इसलिए खाना खाने के बाद मिश्री का सेवन जरूर करें।


उधर...

कोरोना से ठीक हुए बुजुर्गों में युवाओं के मुकाबले वायरस निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी ज्यादा तादाद में हैं। चीन के शंघाई में एक अस्पताल से फरवरी में डिस्चार्ज हुए हल्के संक्रमण वाले 175 लोगों की जांच में यह परिणाम सामने आया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अधेड़ उम्र से लेकर बुजुर्ग मरीजों के प्लाज्मा में न्यूट्रलाइजिंग और स्पाइक-बाइंडिंग एंटीबॉडी का स्तर तुलनात्मक रूप से ज्यादा था। 30 फीसदी युवाओं में तो उम्मीद के उलट एंटीबॉडी का स्तर मानक से कम पाया गया। दस में तो इनका स्तर इतना कम था कि यह पकड़ में ही नहीं आ पाईं। वहीं, सिर्फ दो मरीजों में एंटीबॉडी का स्तर अत्यधिक था। वैज्ञानिकों को मरीजों के नमूनों से वायरल डीएनए का पता न लग पाने के कारण इनमें संक्रमण के स्तर की सही जानकारी नहीं मिल पाई। इसलिए यह बात भी स्पष्ट नहीं हो पाई कि क्या युवाओं में हल्के संक्रमण के कारण ही एंटीबॉडी कम बनी थीं। शोध में हुए कई खुलासे से वैज्ञानिक भी चकित हैं। दरअसल, अधिक एंटीबॉडी होने के बाद भी बुजुर्ग जल्दी ठीक नहीं हो पाए। यानी बुजुर्ग और युवा मरीजों को ठीक होने में एक समान समय लगा। ठीक हुए इन लोगों की बीमारी की औसत अवधि 21 दिन, अस्पताल में भर्ती रहने का औसत समय 16 दिन और औसत आयु 50 साल थी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि बुजुर्गों में एंटीबॉडी का अधिक स्तर उनके मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र के कारण भी हो सकता है। हालांकि, सिर्फ मजबूत एंटीबॉडी के कारण ही उनमें गंभीर संक्रमण से बचाव के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं क्योंकि दुनियाभर में तो यही पाया गया है कि कोरोना के प्रति बुजुर्ग ज्यादा कमजोर हैं।

जानकारी यहीं तक...

अब बारी है श्रोताओं के पत्र शामिल करने की।

पहला पत्र हमें भेजा है, खंडवा, मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं आज मैं अपने खंडवा शहर के बारे मे एक छोटी सी जानकारी देना चाहता हूं जो कि इस प्रकार है :-

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खंडवा शहर का प्राचीन नाम खांडववन { खांडव वन }था जो मुगलों और अंग्रेजों के आने से बोलचाल में धीरे धीरे खंडवा हो गया। मान्यतानुसार श्रीरामजी के वनवास के समय यहां सीता माता को प्यास लगी थी तथा रामजी ने यहां तीर मारकर एक कुआ बना दिया और उस कुएं को रामेश्वर कुए के नाम से जाना जाता है जो खंडवा के रामेश्वर नगर में नवचंडी माता मंदिर के पास स्थित है अतः खंडवा मान्यता अनुसार हजारों वर्ष पुराना है जिसका आधुनिक रूप वर्तमान खंडवा है 12वीं शताब्दी में यह नगर जैन मत का महत्त्वपूर्ण स्थान था। यह नगर पुरातन नगर है, यहाँ पाये जाने वाले अवशेषों से यह सिद्ध होता है, इसके चारों ओर चार विशाल तालाब, नक़्क़ाशीदार स्तंभ और जैन मंदिरों के छज्जे स्थित हैं। खंडवा जिले से ही बुरहानपुर जिला बना है |


== आधुनिक नगर ==

1864 से यह नगर मध्य प्रदेश के नवगठित निमाड़ ज़िले का मुख्यालय रहा। 1867 में इसे नगरपालिका बना दिया गया। भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित खंडवा एक प्रमुख शहर है। 6200 वर्ग किलोमीटर के विस्तार वाले खंडवा की सीमा बेतूल, होशंगाबाद, बुरहानपुर, खरगोन और देवास से मिली हुई हैं। ओंकारेश्‍वर यहां का बहुत ही लोकप्रिय प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल है। ओंकारेश्‍वर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

वहीं आगे लिखते हैं कि पिछला टी टाइम कार्यक्रम बहुत ही अच्छा लगा ।

इसमें अजीबोगरीब बातों के क्रम में दुनिया के सबसे महंगे कीड़े के बारे में आपके द्वारा दी गई जानकारी बेहद ही रोचक लगी । साथ ही मुस्लिम देश इंडोनेशिया में स्थित एक बेहद ही खास मंदिर " तनाह लोत मंदिर " के बारे में दी गई जानकारी बहुत अच्छी लगी । साथ ही कार्यक्रम टी टाइम मे श्रोता मित्रों की प्रतिक्रियाएं , हिन्दी गीत , मजेदार जोक्स आदि सुनकर मन खुशी से झूम उठा । धन्यवाद

दोस्ती शायरी :-

तेरी दोस्ती को पलकों पर सजायगें ।

जब तक ज़िन्दगी है साथ निभायेगें ।

देने को तो कुछ नही हमारे पास ।

पर तेरी खुशी माँगने खुदा के पास जरुर जायेंगे ।


अगला पत्र हमें भेजा है, पंतनगर, उत्तराखंड से वीरेंद्र मेहता ने। लिखते हैं,

नमस्कार (नी हाउ )

टी टाइम प्रोग्राम का नया अंक सुना - जिसमें अनिल जी ने कीड़ा जड़ी या यार्सागुंबा के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दी । इससे ही जुड़ी जानकारी आपके साथ साझा कर रहा हूं , कुछ साल तक मैं उत्तराखंड पर्यटन के साथ जुड़ा था । यह हमें 1 साल में एक या दो शिविर फ्री में मुहैया करवाती है । 2011 में हमारा शिविर 23 लोगों की टीम के साथ पिंडारी ग्लेशियर के माउंटेन क्लाइंबिंग पर गया था। तब मैंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की थी । पिंडारी ग्लेशियर के पास में एक गांव है जिसका नाम खाती है । यहां के लोग कीड़ा जड़ी का व्यापार करते हैं , यह तब हमें ₹100 में एक कीड़ा जड़ी दे रहे थे । उस समय तब इसके बारे में हमें कुछ भी ज्यादा जानकारी नहीं थी , पर जब मैंने इसे हाथ में पकड़ा तो यह सचमुच एक कीड़े की तरह लगता है । यह लगभग 2 इंच का होता है जिसका आधार ऊपर का हिस्सा जड़ी जिसका कलर काला व आधा नीचे का हिस्सा जिस को कीड़ा कहा जाता है , जो कि जमीन में गड़ा हुआ होता है लगभग 1 इंच , इसका कलर पीला होता है । तो इसका कलर आधा काला वह आधा पीला होता है जो कि प्राकृतिक रूप से उगा हो । इस तरह इस का लोकल में नाम कीड़ा जड़ी कहा जाता है । यहां के कुछ लोग इससे ही अपनी दिन चर्या चलाते हैं यह बहुत कम मात्रा में होती है यह लोग इसके लिए हिमालयन क्षेत्रों में चढ़ते हैं स्थानीय लोग यह बताते हैं कि प्राकृतिक वाली कीड़ा जड़ी फ्रेश बर्फ जब गिरती है तो उसके बाद इसका निर्माण होता है । पिंडारी ग्लेशियर का दृश्य बहुत ही आकर्षक और सुंदर है । टी टाइम प्रोग्राम के अगले अंक में पिंडारी ग्लेशियर और कफनी ग्लेशियर ग्लेशियर जो कि उत्तराखंड के बागेश्वर डिस्ट्रिक्ट में आते हैं , वहां से जुड़ी अपनी यात्रा का अनुभव आपके साथ साझा करूंगा ऑडियो के माध्यम से । और वही तनाह लोत मंदिर मंदिर के बारे में संक्षिप्त में जानकारी दी गई जो कि इंडोनेशिया के बाली में है जानकारी अच्छी लगी । धन्यवाद !! मेरा चाइना रेडियो इंटरनेशनल हिंदी को एक सुझाव है अगर यह संभव हो तो इस पर विचार कीजिए , सुझाव यह है कि आजकल सभी श्रोता बंधु अपने ही घर में रहकर कार्य कर रहे होंगे , इस लॉक डाउन के दौरान तो ऐसे में उनसे टेलीफोन करके आजकल क्या कर रहे हैं , या वह अपना समय का प्रयोग कैसे करते हैं, और उनके अनुभव आदि इसके बारे में जानकारी लेकर प्रस्तुत किया जाए ! और सभी श्रोता बंधुओं को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाए ।


अगला पत्र भेजा है, दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं, "खेल जगत" में बताया गया कि कोरोना वायरस के कारण ब्रिटिश ओपन गोल्ड टूर्नामेंट द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार रद्द कर दिया गया है और अब वह 2021 में होगा। वहीं बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बी.डब्ल्यू.एफ.) ने भी जुलाई के अंत तक निर्धारित सभी टूर्नामेंट को स्थगित करने का फैसला लिया है। यह जानकर हम लोगों को खुशी मिली कि भारत ने 2027 के ए. एफ. टी. एशियाई कप फुटबॉल की मेजबानी के लिए दावा पेश किया है।

वहीं "टी टाईम" भी ध्यान से सुना, जिसमें आपने बताया कि भारत में 'कीड़ा जड़ी' के नाम से जाना जाने वाला दुर्लभ कीड़ा हिमालयी क्षेत्रों में 3 से 5 हजार मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। नेपाल, चीन और तिब्बत में अलग अलग नामों से जाना जाता है। दुनिया का सबसे महंगा वह कीड़ा नेपाल में 10 लाख रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इस कीड़े के दाम सुनकर हमलोग आश्चर्य चकित रह गये।

वहीं इंडोनेशिया में स्थित एक मंदिर सागर तट पर स्थित एक बड़ी सी चट्टान पर बना है। वह मंदिर 'तनाह लोत मंदिर' के नाम से जाना जाता है, जो इंडोनेशिया के बाली में है।

अगली जानकारी में सुना कि भारत में लॉकडाउन के दौरान निजामुद्दीन और अन्य संवेदनशील इलाकों में लोगों पर नजर रखने के लिए पुलिस ड्रोन कैमरों की मदद ले रही है।

धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।


अब पेश करते हैं केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल का पत्र। लिखते हैं "खेल जगत" के तहत अनिल पाण्डेय द्वारा आज भी संक्षेप में खेलों पर दी गयी जानकारी सागर में गागर भरने जैसी लगी। फिर चाहे कोरोना महामारी के चलते दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दूसरी बार रद्द होने वाली मशहूर ब्रिटिश ओपन गोल्फ़ टूर्नामेंट की बात हो या कि भारत में नेशनल राइफ़ल शूटिंग प्रतियोगिता के स्थगन की, या विश्व में तमाम बैडमिंटन स्पर्द्धाएं जुलाई तक रद्द होने की बात, सब कुछ निराशाजनक कहा जायेगा। सउदी अरब के 29 वर्षीय फुटबॉलर को अटक रखने। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा अपनी खेल लीग्स के फिर से शुरू होने की उम्मीद तथा भारत द्वारा महाद्वीपीय फुटबॉल स्पर्धा एएफ़पी का 2027 में अपने यहां आयोजित कराये जाने का दावा पेश किया जाना भी महत्वपूर्ण कहा जायेगा। धन्यवाद एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिये।

आगे लिखते हैं कि "टी टाइम" का आगाज़ दुनियाभर में कीड़ों की ऐसी प्रजातियों की जानकारी से किया गया, जिन्हें लोग बड़े चाव से खाते हैं। अफ़सोस कि इन्सान अपने स्वार्थ के लिये किसी चीज़ को भी नहीं छोड़ता। आपने हिमालय क्षेत्र में पाये जाने वाले एक ख़ास कीड़े का ज़िक्र किया, जिसका इस्तेमाल जड़ी-बूटी की तरह किया जाता है। ख़ैर, हम ठहरे शाकाहारी, इसलिये इसमें चाहते हुये भी अपनी रुचि प्रदर्शित नहीं कर सकते।

हाँ, इंडोनेशिया स्थित सहस्र वर्ष पुराने 'तनाह लोत' नामक मन्दिर से जुड़ी जानकारी अवश्य रुचिकर लगी। 'तनाह लोत' का शाब्दिक अर्थ भी समझ में आया। इसके साथ ही यह जान कर भी खुशी होती है कि भारतीय प्राचीन संस्कृति के अवशेष कहाँ-कहाँ तक फ़ैले हुये हैं !

वहीं, लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक तौर पर घरों से बाहर निकलने वाले लोगों पर नजर रखने एवं संक्रमणरोधी दवा का छिड़कने के काम में सरकार द्वारा ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किये जाने सम्बन्धी जानकारी तकनीकी उपयोग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कही जायेगी, परन्तु न जाने क्यों मुझे ऐसा लगा कि जानकारी को ज़रूरत से अधिक लम्बा कर दिया गया।आशा है कि आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लेंगे।

जानकारियों के अलावा कार्यक्रम में पेश श्रोताओं की प्रतिक्रिया एवं तीनों जोक्स ठीक-ठाक कहे जायेंगे। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

सुरेश जी, धन्यवाद।

अब बारी है जोक्स की। जो दुर्गेश नागनपुरे ने भेजे हैं।

पहला जोक

डॉक्टर : क्या तकलीफ है ?

मरीज : सीने में दर्द है अंकल ।

डॉक्टर : सिगरेट पीते हो ?

मरीज : हाँ , लेकिन गोल्ड फ्लैग ही मंगवाना ..!!!!!!!


दूसरा जोक

पप्पू पत्नी से लड़कर बाल कटवाने गया

नाइ : कितने छोटे काटूं ..... ????

पप्पू : इतने छोटे काट दो की बीबी के हाथ में ना आएं...!!!!!


तीसरा जोक

जज : तुमने पुलिस वाले की जेब में

जलती हुई तीली क्यों रखी ...?????

बबलू : उसी ने कहा था ........!!!!

जमानत करवानी है तो पहले जेब गरम करो.......

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