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2020-04-23 15:53:05
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अनिलः सबसे पहले यह जानकारी। पूरे विश्व भर में 22 अप्रैल को अर्थ डे यानी कि पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस दिन को पृथ्वी दिवस के तौर पर सेलिब्रेट करने का सबसे बड़ा मकसद होता है कि लोगों को याद दिलाना की पृथ्वी और इसका पर्यावरण हमें जीवन प्रदान करता है। इस दिन पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लिया जाता है।

22 अप्रैल 1970 को पहला अर्थ डे मनाया गया था। इसकी शुरुआत एक अमेरिकी सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने की थी। साल 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव के कारण भारी बर्बादी हुई थी, जिससे वह बहुत आहत हुए और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कुछ करने का फैसला किया। 22 जनवरी को समुद्र में तीन मिलियन गैलेन तेल रिसाव हुआ था, जिससे 10,000 सीबर्ड, डाल्फिन, सील और सी लायन्स मारे गए थे। इसके बाद नेल्सन के आह्वाहन पर 22 अप्रैल 1970 को लगभग दो करोड़ अमेरिकी लोगों ने पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में भाग लिया था।

नेल्सन ने ऐसी तारीख को चुना जो इस दिवस में लोगों की भागीदारी को अधिकतम कर सके। उन्हें इसके लिए 19 से 25 अप्रैल तक का सप्ताह सबसे अच्छा लगा।


नीलमः अब समय हो गया है दूसरी जानकारी का।

अमेरिका के रहने वाले एक पति-पत्नी के साथ तीन साल पहले यह वाकया हुआ। उनकी अंगूठी तीन साल पहले खो गई थी, जो अब वो उन्हें एक बार फिर से मिल गई है और वो भी एक रेस्टोरेंट से। यह रेस्टोरेंट न्यूयॉर्क में है और जिस कपल की यह अंगूठी है, उनका नाम माइक और लिसा है।

दरअसल, कोरोना वायरस की वजह से न्यूयॉर्क से लेकर फ्लोरिडा तक लगभग सभी रेस्टोरेंट बंद हैं। ऐसे में फ्लोरिडा में मौजूद कोकोनट रेस्टोरेंट के मैनेजेर रयान क्रिवॉय ने सोचा कि क्यों न रेस्टोरेंट का रेनोवेशन (नया बनाने की कोशिश) कर दिया जाए। इसके बाद वो रेस्टोरेंट की साफ-सफाई में जुट गए, तभी उन्हें एक अंगूठी और एक सोने का सिक्का मिला। उस अंगूठी पर माइक और लिसा लिखा हुआ था और साथ में एक तारीफ भी लिखी हुई थी। अब उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था कि वो इस अंगूठी और सोने के सिक्के का करें क्या। यह बात उन्होंने रेस्टोरेंट की मार्केटिंग मैनेजर साशा फॉर्मिका से बताई, जिसके बाद साशा ने उस अंगूठी की एक तस्वीर लेकर फेसबुक पर डाल दी और सारी कहानी बयां की।

देखते ही देखते साशा की पोस्ट वायरल हो गई। करीब 5000 लोगों ने उनकी पोस्ट को अपने फेसबुक टाइमलाइन पर शेयर किया। इसका नतीजा ये हुआ कि अंगूठी की तस्वीर माइक और लिसा तक भी पहुंची। इसके बाद उन्होंने पोस्ट में दिए गए फोन नंबर पर संपर्क किया। साशा से उनकी बात हुई और उन्होंने बताया कि 2017 में वो उनके रेस्टोरेंट में खाने के लिए आए थे, लेकिन हाथ धोने के क्रम में अंगूठी उनके हाथ से निकलकर कहीं गिर गई थी।


अनिलः

अगर आप अफ्रीकी देशों या फिर द्वीपीय देशों के बारे में थोड़ी बहुत भी जानकारी रखते होंगे तो आपको मेडागास्कर के बारे में जरूर पता होगा। यह हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित एक द्वीपीय देश है। मुख्य द्वीप, जिसे मेडागास्कर कहा जाता है, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा द्वीप है। यह एक ऐसा देश है, जहां खास मौकों पर पुरुष हों या महिलाएं, बच्चा हो या बूढ़ा, सब एक जैसे ही कपड़े पहनते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'लाम्बा' कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां शादियों में तो लोग लाम्बा पोशाक पहनते ही हैं, साथ ही साथ मृतकों के लिए भी कफन के तौर पर लाम्बा का ही इस्तेमाल होता है।


दरअसल, मेडागास्कर सैकड़ों साल पहले अफ्रीका से अलग हो चुका है। यही वजह है कि इस द्वीप पर पाए जाने वाले अधिकांश पौधे और जीव-जंतु पृथ्वी पर और कहीं नहीं पाए जाते हैं। मेडागास्कर का पुराना नाम मालागासी है। इस द्वीप पर रहने वाले लोग इसे इसी नाम से जानते हैं।

मेडागास्कर की लगभग 75 फीसदी जातियां स्थानिक हैं, यानी वो यहां के अलावा दुनिया में कहीं और नहीं पाई जाती हैं। इस द्वीप पर कई अजीब जंतु भी पाए जाते हैं, जिनमें टेनरेक्स (कांटों वाला चूहा), चमकीले रंगों वाले गिरगिट शामिल हैं। हालांकि यहां के कई जीव-जंतु अब विलुप्त होने की कगार पर हैं।

अब बारी श्रोताओं की टिप्पणी की..


नीलमः पहला पत्र हमें भेजा है, खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं आपको हमारा प्यार भरा नमस्कार , आदाब और वेरी गुड इवनिंग ।

लिखते हैं हमें पिछला टी टाइम कार्यक्रम बहुत पसंद आया । जिसमें आपके द्वारा भारत के खूबसूरत बीचों ( समुद्र के किनारों ) के लिए प्रसिद्ध गोवा राज्य के बारे में दी गई जानकारी बहुत ही रोचक लगी । वहीं दिग्गज टेक कंपनी गूगल के बारे में दी गई जानकारी भी बहुत लाभदायक लगी । साथ ही माउथ फ्रेशनर के तौर पर सेवन की जाने मिश्री के बारे मे दी गई जानकारी भी लाजवाब थी । बेहतरीन प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।


अनिलः दुर्गेश लिखते हैं, शायरी भेज रहा हूं। दोस्ती शायरी :-

दोस्त के लिए दोस्ती की सौगात होगी ।

नये लोग होंगे नई बात होगी ।

हम हर हाल में मुस्कुराते रहेंगे ।

अपनी दोस्ती अगर यूं ही साथ होगी ।

लिखते हैं कि आज मैं खंडवा शहर के प्रसिद्ध संत श्री धूनीवाले दादाजी के बारे में एक छोटी जानकारी देना चाहता हूं जो कि इस प्रकार है :-

दादाजी धूनीवाले की गिनती भारत के महान संतों में की जाती है। दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिरडी के साँईबाबा का। दादाजी (स्वामी केशवानंदजी महाराज) एक बहुत बड़े संत थे और लगातार घूमते रहते थे। प्रतिदिन दादाजी पवित्र अग्नि (धूनी) के समक्ष ध्यानमग्न होकर बैठे रहते थे, इसलिए लोग उन्हें दादाजी धूनीवाले के नाम से स्मरण करने लगे।

शिव और दत्त अवतार :-

दादाजी धूनीवाले को शिव तथा दत्तात्रेय भगवान का अवतार मानकर पूजा जाता है और कहा जाता है कि उनके दरबार में आने से बिन माँगी दुआएँ भी पूरी हो जाती हैं। दादाजी का जीवन वृत्तांत प्रामाणिक रूप से उपलब्ध नहीं है, परंतु उनकी महिमा का गुणगान करने वाली कई कथाएँ प्रचलित हैं।

दरबार :-

दादाजी का दरबार उनके समाधि स्थल पर बनाया गया है। देश-विदेश में दादाजी के असंख्य भक्त हैं। दादाजी के नाम पर भारत और विदेशों में सत्ताईस धाम मौजूद हैं। इन स्थानों पर दादाजी के समय से अब तक निरन्तर धूनी जल रही है। सन् 1930 में दादाजी ने मध्य प्रदेश के खण्डवा शहर में समाधि ली। यह समाधि रेलवे स्टेशन से 3 किमी की दूरी पर है। दुर्गेश जी धन्यवाद।


नीलमः अब बारी है अगले पत्र की। जिसे भेजा है, पंतनगर, उत्तराखंड से वीरेंद्र मेहता ने। लिखते हैं, नी हाउ

हर बार की तरह प्रोग्राम में कुछ नया व नई जानकारियां थी। जिस क्रम में आज गोवा के इतिहास के पन्ने पलटे गए गए । मेरे लिए यह जानकारी बिल्कुल नई थी । गोवा 1947 में आजाद ना होकर 19 दिसंबर 1961 को हुआ था, पुर्तगालियों के चंगुल से । उन्होंने तो 450 वर्ष तक इस पर कब्जा किये रखा। शायद उन्हें आज भी सपनों में गोवा ही नजर आता होगा । और कोरोना की महामारी से सभी लोग इस वक्त में एक योद्धा बने हुए हैं , जो कि गवर्मेंट के गाइडलाइन और निर्देशों का पालन कर रहे हैं । पर इसमें जो नींव बनकर खड़े हैं - जिसमें पुलिसकर्मी, डॉक्टर ,नर्स ,सफाई कर्मचारी , दुकानदार, साग सब्जी बेचने वाले और डिलीवरी ब्वॉय आदि शामिल है । इन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद !! वही मिश्री के सेवन से पहुंचने वाले फायदों के बारे में जाना , पर पहाड़ों में तो सर्दी में गुण व गर्मियों में मिश्री का ही ज्यादातर सेवन होता है चीनी की जगह । और वही केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल जी की शायद एक यह शंका रही होगी कि " कीड़ा जड़ी सचमुच में कीड़ा ही होता है " मैं उन्हें यह बताना चाहूंगा कि यह कीड़ा नहीं होता यह दिखने में आधा कीड़े जैसा वह आधा जड़ जैसा होता है इसलिए इसको लोकल में कीड़ा जड़ी बोला जाता । अलग-अलग जगहों पर यह अलग नामों से जाना जाता है , जैसे यार्सागुंबा , कॉर्डीसेप्स साइनेसीस आदि जो कि एक प्रकार की फंगस होती है और यह औषधि में गुणों से भरपूर होती है असल में यह एक प्राकृतिक जड़ी बूटी है इसकी तो कई जगह पर अब ऑर्गेनिक खेती भी की जाती है । कृपया मुझे भी व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें यह मेरा व्हाट्सएप नंबर है - 9958 36 5462 ,धन्यवाद । आज मैं आपके साथ पिंडारी ग्लेशियर और काफी ग्लेशियर से जुड़ी अपनी यात्रा का अनुभव साझा कर रहा हूं इस ऑडियो के माध्यम से -

अनिलः अब बारी है, दरभंगा, बिहार से शंकर प्रसाद शंभू के पत्र की। लिखते हैं पिछले प्रोग्राम में आपने खूबसूरत बीचों के लिए प्रसिद्ध गोवा के भारत के आजादी के बाद भी 14 वर्षों तक पुर्तगालियों के कब्जे में रहने की जानकारी दी। मैंने यह पहली बार सुना, सचमुच इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। कार्यक्रम से मुझे ज्ञात हुआ कि वर्ष 1510 में पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किया और लगभग 450 वर्षों के बाद 19 दिसंबर 1961 को गोवा पुर्तगालियों से आजाद हुआ था।

दूसरी जानकारी में सुना कि कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन में भी गूगल ने आज डूडल बनाकर पैकेजिंग, शिपिंग और डिलीवरी के माध्यम से अपने कर्मचारियों की जान जोखिम में डालकर लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं। इस विकट समय में भी वे जरूरत मंद लोगों को सेवा दे रहे हैं, यह सराहनीय कदम है।

स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी देते हुए बताया गया कि नियमित तौर पर मिश्री का सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ने के साथ ही रक्त संचार भी सही रहता है। मिश्री का सेवन करने से पाचन क्रिया भी बेहतर होती है।

हिन्दी गीत- ये तेरा मेरा मिलना--- मधुर एवं रोमांटिक लगा, जो फिल्म 'आप का सुरूर' से लिया गया था और आवाज हिमेश रेशमिया एवं श्रेया घोषाल की थी।

धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

नीलमः अब पेश है केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल का पत्र।

लिखते हैं साप्ताहिक "खेल जगत" के तहत अनिल पाण्डेय द्वारा हर बार की तरह आज भी कम समय में अधिक जानकारी उपलब्ध करायी गयी। राफेल नडाल तथा एंडी मरे का 27 से 30 अप्रैल तक मैड्रिड ऑनलाइन वर्च्युअल टूर्नामेंट में भाग लेने सम्बन्धी जानकारी हमारे लिये भी एक नया एहसास थी। अमेरिकी गोल्फर सैण्डर्स का 86 वर्ष की आयु में निधन का समाचार निराशाजनक तो था, परन्तु इस पर किसी का ज़ोर नहीं चलता। भारतीय मुक्केबाजी परिसंघ द्वारा दिसम्बर में भारत में मुक्केबाजी प्रतियोगिता आयोजित किये जाने तथा एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया द्वारा प्रशिक्षण के दौरान किसी भी खिलाड़ी को घर न जाने देने की घोषणा का समाचार भी काफी अहम लगा। और हाँ, बाइचुंग भूटिया द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल संघ का अध्यक्ष बनने की इच्छा ज़ाहिर करने सम्बन्धी ख़बर भी काफी अच्छी लगी। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

अनिलः सुरेश जी आगे लिखते हैं कि पिछले प्रोग्राम "टी टाइम" की शुरुआत ख़ूबसूरत समुद्री तटों वाले गोवा प्रदेश की आज़ादी की कहानी से किया जाना अत्यंत ज्ञानवर्ध्दक लगा। सामान्यतः लोग यह नहीं जानते कि गोवा को मुक्ति भारत की आज़ादी से 14 साल बाद मिली एवं इसके लिये डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जैसे नेता को दो साल तक पुर्तगालियों की क़ैद में रहना पड़ा था।

वहीं दिग्गज टेक कंपनी गूगल द्वारा पैकेजिंग, शिपिंग एवं डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करने डूडल तैयार किया जाना काफी अनुकरणीय लगा।

वहीं खाना खाने के बाद मिश्री एवं सौंप का इस्तेमाल किया जाना तो आम बात है, परन्तु मिश्री शरीर में हीमोग्लोबिन की वृध्दि के साथ नकसीर को भी बंद कर सकता है, यह हमने पहली बार जाना।

जानकारियों के क्रम में यह जान कर आश्चर्य हुआ कि कोरोना से ठीक हुए बुजुर्गों में वायरस निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी युवाओं के मुकाबले कहीं अधिक मात्रा में पायी गयी है। चीन के शांगहाई में एक अस्पताल में किया गया यह शोध अत्यंत महत्वपूर्ण कहा जायेगा।

नीलमः कार्यक्रम में "टी टाइम" के गतांक में आप द्वारा 'कीड़ा-जड़ी' पर दी गयी जानकारी को पंतनगर, उत्तराखण्ड के श्रोता-भाई वीरेन्द्र मेहता द्वारा आगे बढ़ाया जाना अच्छा लगा।

हर बार की तरह आज भी कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रिया एवं जोक्स आदि को समुचित स्थान दिया जाना महत्वपूर्ण लगा। धन्यवाद फिर एक शानदार प्रस्तुति के लिये। साथ ही लिखते हैं कि

टी टाइम के लिये यह ऑडियो जोक भेज रहा हूँ, उचित लगे तो काम में लेने का कष्ट करें। धन्यवाद।


अनिलः अब बारी है जोक्स की, जो कि दुर्गेश नागनपुरे ने

पहला जोक

पति :- आज खाना सासु माँ ने बनाया है क्या ..?????

पत्नी : वाह कैसे पहचाना ...!!!!!!!!!!


पति : जब तुम बनाती थी तो काले बाल निकलते थे ...

आज सफ़ेद निकले हैं.....!!!!!!!!

दूसरा जोक


एक बहु अपने ससुर से कहती है


बाबू जी इलाइची ख़तम हो गयी है आते समय बाजार से लेते आना

ससुर : हमारे यहाँ बड़ों का नाम नहीं लेती, इलाइची तुम्हारी सास का नाम है

बहु : ठीक है आगे से ध्यान राखहूँगी ...!!!!!!!!!!!!


अगली बार बहु ने कुछ ऐसा कहा की ससुर के होश उड़ गए ..!!!!!!!!!!


बहु : बाबू जी माँ जी ख़तम हो गयी हैं आते समय

बाजार से लेते आना ........

.

ससुर : बेहोश

तीसरा जोक

पप्पू ने एक राह चलती लड़की से कहा .......

आपने पहचाना मुझे ..!!!!!!

लड़की : नहीं ..!!!! आप कौन हैं ??????


पप्पू : में वही हूँ ...!! जिसे आपने कल भी नहीं पहचाना था.......

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