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2020-06-04 15:17:15
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लेकिन सभी पेड़ या पौधे एक समान स्तर पर प्रदूषण खत्म नहीं करते। इसके लिए पहले ये जानना जरूरी है कि कहां किस स्तर का प्रदूषण है और फिर उसके मुताबिक ही वहां पेड़ लगाए जाएं। साथ ही ये समझना भी जरूरी है कि पेड़ हवा की गुणवत्ता बेहतर करते हैं, न कि हवा को पूरी तरह साफ करते हैं। हवा स्वच्छ बनाने के लिए जरूरी है कि कार्बन उत्सर्जन कम से कम किया जाए।

पौधे वातावरण के लिए फेफड़ों का काम करते हैं। ये ऑक्सीजन छोड़ते हैं और वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड सोख कर हवा को शुद्ध बनाते हैं। पौधों की पत्तियां भी सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड जैसे खतरनाक तत्व अपने में समा लेती हैं और हवा को साफ बनाती हैं। यही नहीं, कई तरह के प्रदूषित तत्व पौधों की मखमली टहनियों और पत्तियों पर चिपक जाते हैं और पानी पड़ने पर धुल कर बह जाते हैं।


रिहाइशी इलाकों की तुलना में सड़कों पर प्रदूषण ज्यादा होता है। लिहाजा यहां ज्यादा घने और चौड़ी पत्तियों वाले पेड़ लगाने चाहिए। पत्तियां जितनी ज्यादा चौड़ी और घनी होंगी, उतना ही ज्यादा प्रदूषण सोखने में सक्षम होंगी। एक रिसर्च बताती है कि छोटे रेशे वाली पत्तियों के पौधे भी PM नियंत्रित करने में अहम रोल निभाते हैं। जैसे देवदार और साइप्रस जैसे पेड़ अच्छे एयर प्यूरिफायर का काम करते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि इन पेड़ों की पत्तियों में PM 2.5 के जहरीले तत्व सोखने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है।


नीलमः अब अगली जानकारी का वक्त हो गया है। दोस्तो, कभी न कभी इंद्रधनुष तो आपने देखा ही होगा। ये अक्सर बरसात के दिनों में दिख जाते हैं। दरअसल, आसमान में एक साथ कई रंग दिखाई पड़ते हैं, जो किसी धनुष की तरह होते हैं, इसीलिए इन्हें इंद्रधनुष कहा जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ये इंद्रधनुष आखिर बारिश के बाद आसमान में क्यों बनते हैं?


सूर्य का प्रकाश में सात प्रकार के रंग मौजूद होते हैं- बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल, जिसे संक्षेप में 'बैनीआहपीनाला' भी कहते हैं। इन रंगों का पता प्रिज्म के जरिए चलता है। इंद्रधनुष असल में प्रकृति का प्रिज्म है। दरअसल, पानी की छोटी-छोटी बूंदें पारदर्शी प्रिज्म का काम करती हैं। जब सूर्य का प्रकाश उनसे होकर गुजरता है तो वो सात अलग-अलग रंगों में टूट जाता है। इसी वजह से हमें इंद्रधनुष दिखाई पड़ते हैं।

इंद्रधनुष में लाल रंग का प्रकाश सबसे ऊपर दिखाई पड़ता है जबकि बैंगनी रंग का प्रकाश सबसे नीचे। माना जाता है कि बारिश की बूंदों के बीच अगर धूप भी निकला हो तो सूर्य की तरफ मुंह करके देखने पर इंद्रधनुष जरूर दिखाई पड़ता है। हालांकि हमेशा ऐसा नहीं होता।


अनिलः आपने शायद ध्यान न दिया हो, लेकिन कभी-कभी आसमान में एक नहीं बल्कि दो-दो इंद्रधनुष दिखाई पड़ते हैं। दरअसल, एक ही जगह मौजूद बारिश की बूंदों के बार-बार धूप के संपर्क में आने पर ही दो इंद्रधनुष दिखाई देखने को मिलते हैं। ये इस तरीके से होता है कि पहले इंद्रधनुष से निकली रंगीन रोशनी जैसे ही सफेद में बदलती है, वैसे ही उसका संपर्क बारिश की दूसरी बूंदों से हो जाता है और प्रकाश फिर से अलग-अलग रंगों में बिखर जाता है, लेकिन यह क्रम उल्टा होता है। यानी एक इंद्रधनुष सीधा दिखता है और एक उल्टा।


वहीं अमेजन वैसे भी रहस्यों से भरा जंगल है। एक ऐसा जंगल, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा जंगल कहा जाता है, क्योंकि यह अरबों एकड़ में फैला हुआ है। यह जंगल इतना विशाल है कि यह अकेले ही नौ देशों की सीमाओं को छूता है। कहते हैं कि इस जंगल में ऐसे जीव-जंतु या अन्य चीजें मौजूद हैं, जिनके बारे में इंसान जानता तक नहीं। यही वजह है कि इस जंगल में ज्यादा अंदर तक जाने के बारे में इंसान सोचता तक नहीं। इसी जंगल में मौजूद है एक ऐसी नदी, जिसका पानी हमेशा उबलता रहता है। कहते हैं कि अगर इसके पानी में गलती से भी कोई गिर जाए तो उसकी मौत लगभग तय है।

आंद्रे रूजो के मुताबिक, जब वो बड़े हुए तो भी उबलती हुई नदी की कहानी हमेशा उनके दिमाग में रही। वो अक्सर ऐसा सोचते कि क्या ऐसा संभव है। यहां तक कि उन्होंने विश्वविद्यालय के अपने सहयोगियों, तेल, गैस और खनन कंपनियों से भी इस बारे में जानना चाहा, लेकिन सबका जवाब ना ही था। इसके अलावा अगर वैज्ञानिक तौर पर भी देखें तो ऐसा संभव ही नहीं है कि नदी का पानी हमेशा उबलता रहे, जब तक कि आसपास कोई सक्रिय ज्वालामुखी न हो।


नीलमः इस असमंजस की स्थिति में एक दिन वो अमेजन के जंगलों में पहुंच गए, जहां उन्हें अपनी काल्पनिक कहानी सच होती हुई दिखी। उन्होंने आखिरकार ऐसी नदी को ढूंढ ही निकाला, जिसका पानी रहस्यमय तरीके से उबल रहा था। यह नदी करीब मील लंबी है। रूजो के मुताबिक, इसका पानी इतना गर्म है कि उससे आप चाय भी बना सकते हैं।



अनिलः प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है। अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का।

आज के कार्यक्रम में सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजी गयी दो ऑडियो फाइल शामिल कर रहे हैं।

...........ऑडियो......


पहला पत्र हमें आया है, खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे का। लिखते हैं हमें कार्यक्रम टी-टाइम बहुत अच्छा लगा। इसमें दी गयी सभी जानकारियां अच्छी लगी। साथ ही कार्यक्रम में चीन-भारत मामलों के जानकार आशीष गोरे जी के साथ हुई बातचीत के मुख्य अंश सुनाये गए। वह हमें बहुत ही अच्छे लगे।

वहीं मेरे द्वारा प्रेषित मजेदार जोक्स आपकी मधुर आवाज में सुनकर हमें बहुत हंसी आई। धन्यवाद।

दुर्गेश आगे लिखते हैं कि हमें खेल जगत कार्यक्रम में आपने बताया कि तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी बलवीर सिंह सीनियर का निधन हो गया । यह जानकर बहुत दुःख हुआ।

साथ ही दूसरी जानकारी के अंतर्गत आपने बताया कि जापान की टेनिस सनसनी 22 वर्षीय नाओमी ओसाका अब विश्व में सर्वाधिक कमाई करने वाली महिला खिलाड़ी बन गयी हैं। यही कामना है कि वो इसी तरह कामयाबी हासिल करे और कमाई के और अधिक नये रिकॉर्ड बनाये ।

दुर्गेश जी धन्यवाद।


नीलमः अब बारी है अगले पत्र की। जिसे भेजा है, उत्तराखंड पंतनगर से, वीरेंद्र मेहता ने। लिखते हैं टी टाइम प्रोग्राम का नया अंक सुना - जिसमें कुछ देशों के कानून नियमों से अवगत कराया गया जिसमें, स्विजरलैंड में रात को 10 बजे के बाद फ्लैश ना करना और जिसके पीछे का कारण ध्वनि प्रदूषण बताया गया मुझे तो यह बड़ा फनी व रोचक लगा । और आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में खुद से बल्ब भी नहीं बदल सकते हैं बिना इलेक्ट्रिशियन के आदि -आदि । और अनिल जी की आशीष गोरे जी के साथ बातचीत पेश की गयी। जो चीन में चल रहे सत्र वह कोविड-19 को लेकर थी । अनिल जी द्वारा आशीष जी से पूछे गए प्रश्नों से नई बातें जानने को मिली । और मैं सबसे ज्यादा हैरान तब हुआ जब मैंने यह सुना कि चीन में 5 लाख के तकरीबन विदेशी कंपनियां मौजूद हैं ! पर मुझे एक बात समझ में नहीं आई की चीन में चल रहे सत्र से और देशों में किसका क्या और कैसे लाभ मिलेगा ? धन्यवाद !! क्योंकि चीन विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, तो वहां पर वैश्विक लिहाज से भी फैसले लिए जाते हैं। जिसमें विदेशी निवेश बढ़ाने आदि पर भी ज़ोर होता है, साथ ही कोविड-19 में चीन के अनुभव।

धन्यवाद।


अनिलः अब पेश करते हैं अगला पत्र । जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं आपने पिछले कार्यक्रम में बताया कि यूरोप के स्विट्जरलैंड में रात को बाथरूम जाने के लिए भी कानून का पालन करना पड़ता है क्योंकि वहाँ उसे ध्वनि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

वहीं यूरोप के ही एक देश जर्मनी में किसी गाड़ी में पेट्रोल खत्म होने पर गाड़ी को खींचना गैर-कानूनी माना गया है, जिसके लिए 65 पाउंड का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अगली जानकारी में बताया गया कि ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में घर या ऑफिस में बल्ब बदलने का काम स्वयं करना गैरकानूनी है। वहां पर क्वालिफाइड इलेक्ट्रिशियन ही ऐसा कर सकता है।

नीलमः आगे लिखते हैं अन्य यूरोपीय देश इटली के मिलान शहर में हमेशा अपने चेहरे पर मुस्कान रखने की बात सौभाग्यपूर्ण लगा।

कार्यक्रम के अगले भाग में चीन-भारत मामलों के जानकार और बहुराष्ट्रीय कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत आशीष गोरे के साथ हुई बातचीत के मुख्य अंश सुनाये गये, जिसमें मुख्य रूप से चीन में आज कल चल रहे दो सत्रों और कोविड-19 महामारी के दौर में बदलते परिदृश्य पर चर्चा की गई। उन्होंने सभी प्रश्नों के उत्तर बिल्कुल सटीक और सरल रूप में दिये।

धन्यवाद।


अनिलः अब पेश करते हैं, केसिंगा, उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल का खत। लिखते हैं "खेल जगत" के तहत अनिलजी द्वारा शुरुआत में दी गयी तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी बलवीर सिंह सीनियर के निधन की जानकारी काफी दुःखद लगी। खुशी की बात है कि उन्होंने अपने करिश्माई खेल से देश की प्रतिष्ठा बढ़ाई और लम्बा जीवन पाया। हम उन महान खिलाड़ी की आत्मा की सदगति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

वहीं जापान की टेनिस सनसनी 22 वर्षीय नाओमी ओसाका द्वारा सेरेना विलियम्स जैसी दिग्गज खिलाड़ी को पछाड़ कर विश्व में सर्वाधिक कमाई करने वाली महिला खिलाड़ी बनना तमाम खेल-प्रेमियों के लिये गर्व की बात है।

वहीं कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुये ओलंपिक क्वॉलिफाइंग इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के अब 8 से 13 दिसंबर तक आयोजित होने का समाचार उत्साहवर्ध्दक लगा। धन्यवाद फिर एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिये।

नीलमः सुरेश जी आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "टी टाइम" में बीजिंग में ज़ारी एनपीसी और सीपीपीसीसी के दो सत्रों तथा कोविड-19 के सम्बंध में चीन-भारत मामलों के जानकार आशीष गोरे के साथ की गयी ख़ास बातचीत के चलते आज का यह अंक विशेषांक बन गया। जिसके लिये आपका ख़ास तौर पर धन्यवाद। कोरोना महामारी के चलते मार्च के बजाय मई माह में आयोजित उक्त सत्रों पर गोरे जी के विचार सटीक जान पड़े। उनके विचारों में साफ़गोई स्पष्ट तौर पर झलक रही थी। कोरोना विवाद के चलते बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के चीन से पलायन के प्रश्न पर उनका विचार बिलकुल सही लगा कि -इक्का-दुक्का को छोड़ अधिकतर कम्पनियों का चीन छोड़ना आसान नहीं होगा, क्योंकि कम्पनियों के भी चीन से व्यापक हित जुड़े हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थित से निपटने एवं विश्वास बाहाली सम्बन्धी प्रश्न पर -चीन द्वारा और अधिक पारदर्शिता अपनाये जाने का उनका उनका विचार भी काफी व्यावहारिक कहा जायेगा। उनका यह कहना भी सही लगा कि जिस प्रकार कोविड-19 महामारी को परास्त कर चीन द्वारा अपने उद्योगों में 80-90 प्रतिशत उत्पादन बहाली की मिसाल कायम की गयी है, उसी प्रकार चीन अन्य देशों के साथ भी अपने अनुभव साझा करे। चीन में ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रम में मिली अभूतपूर्व सफलता के पीछे उसकी कर्मठता होना, यह विचार भी शत-प्रतिशत सही लगा, अन्यथा 80 करोड़ से अधिक आबादी को ग़रीबी से बाहर निकालना कोई आसान कार्य नहीं है।

वहीं कार्यक्रम में पेश अन्य जानकारियां भी अच्छी लगी।

इन तमाम बातों के अलावा आज के विशेषांक में भी श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं एवं चुटीले जोक्स इसे ख़ास बना गये। धन्यवाद फिर एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिये।


अनिलः श्रोताओं के पत्रों के बाद बारी है जोक्स की। जो कि दुर्गेश जी ने भेजे हैं।

पहला जोक

खाना खाते खाते अचानक पतिदेव बोले,

पति V ये सम्मोहन करना किसे कहते हैं?

पत्नी V अरे किसी को अपने वश में करने को ही

सम्मोहन कहते हैं,

पति V चल झूठी,

उसे तो शादी कहते हैं

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